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पटना एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की राह साफ,रडार स्थापना से बदलेगा राजधानी का हवाई भविष्य
- Reporter 12
- 02 Feb, 2026
पटना एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की लंबे समय से चली आ रही उम्मीद अब ठोस हकीकत की ओर बढ़ती दिख रही है।जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रडार इंस्टॉलेशन में आ रही सबसे बड़ी बाधा जमीन की कमी अब दूर होने वाली है,जिसके साथ ही राजधानी पटना का हवाई नक्शा बदलने की तैयारी शुरू हो गई है।जिला प्रशासन ने एयरपोर्ट प्रशासन को रडार स्थापना के लिए दो अलग-अलग स्थानों पर एक-एक एकड़ जमीन चिह्नित कर दी है,जिससे विमानों के सुरक्षित और आधुनिक संचालन की दिशा में बड़ी सफलता मिली है।प्रशासनिक स्तर पर यह फैसला पटना एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के योग्य बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।जिन दो भूखंडों को रडार के लिए चिह्नित किया गया है,उनमें एक जमीन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी आईसीएआर की है,जिसे शीघ्र ही एयरपोर्ट प्रशासन को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।दूसरी जमीन बिहार राज्य औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण यानी बियाडा की है,जो बिहार राज्य पथ विकास निगम कार्यालय के पीछे स्थित है।इस भूखंड पर पहले मॉल निर्माण की योजना थी,लेकिन एयरपोर्ट सुरक्षा मानकों के चलते उस पर आपत्ति जताई गई थी,अब वही जमीन रडार स्थापना के लिए उपयोग में लाई जाएगी।फिलहाल पटना एयरपोर्ट पर विमानों का संचालन पूरी तरह विजुअल और नेविगेशन सिस्टम के सहारे किया जा रहा है।यहां से प्रतिदिन करीब 45 जोड़ी विमानों का आवागमन होता है,लेकिन अत्याधुनिक रडार सुविधा के अभाव में उड़ानों की संख्या और संचालन क्षमता सीमित बनी हुई है।हालांकि लगभग 1200 करोड़ रुपये की लागत से नया टर्मिनल भवन बनकर तैयार हो चुका है,लेकिन तकनीकी संसाधनों की कमी के कारण उसका पूरा लाभ अब तक नहीं मिल पाया है।एयरपोर्ट अधिकारियों का कहना है कि रडार स्थापित होने के बाद एक ही रनवे से अधिक विमानों की लैंडिंग और टेकऑफ संभव हो सकेगी,जिससे उड़ानों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।रडार सिस्टम के जरिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल को विमानों की लोकेशन,स्पीड और दूरी की रियल टाइम जानकारी मिलेगी,जिससे खराब मौसम,घने कोहरे और कम दृश्यता की स्थिति में भी सुरक्षित उड़ान संचालन आसान हो जाएगा।अधिकारियों के अनुसार रडार की स्थापना के बाद पटना एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन सुचारु रूप से शुरू करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।एयरपोर्ट प्रशासन का कहना है कि जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होते ही केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा और कागजी कार्यवाही व तकनीकी इंस्टॉलेशन मिलाकर रडार लगाने में लगभग छह महीने का समय लग सकता है।गौरतलब है कि बिहार में दरभंगा और पूर्णिया एयरपोर्ट पर एयरफोर्स बेस के तहत रडार सुविधा उपलब्ध है,जबकि गया एयरपोर्ट पर अब तक रडार नहीं लगाया जा सका है।ऐसे में पटना एयरपोर्ट पर रडार की स्थापना न सिर्फ राजधानी बल्कि पूरे राज्य के हवाई संपर्क को नई ऊंचाई देने वाली साबित होगी।
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